गरियाबंद।जिले में प्रतिबंधित जर्दा यूक्त गुटखा, उत्पादों का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। नगर में बड़े पैमाने पर गुटखे का भंडारण वितरण किए जाने और वहां से बसों के माध्यम से देवभोग सहित अन्य क्षेत्रों तक भेजे जाने की खबर है। वहीं नगर से वैन और अन्य वाहनों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में भी गुटखे की सप्लाई लगातार की जा रही है।साथ ही नगर के कई चिन्हित दुकानों में खुलेआम गुटखा बेचा जा रहा है।प्रतिबंधित होने के बावजूद इन दुकानों पर आसानी से गुटखा उपलब्ध हो जाना प्रशासनिक निगरानी और कार्रवाई पर सवाल खड़े कर रहा है।जबकि छत्तीसगढ़ सहित देश के कई राज्यों में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत तंबाकू और निकोटिन युक्त गुटखे के निर्माण,भंडारण,

परिवहन, वितरण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है।समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचनाओं के माध्यम से इस प्रतिबंध को आगे बढ़ाया जाता रहा है।

नियमों के अनुसार प्रतिबंधित गुटखे का भंडारण, परिवहन या बिक्री पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।खाद्य सुरक्षा विभाग,पुलिस विभाग और प्रशासन को ऐसे मामलों में जब्ती एवं कानूनी कार्रवाई का अधिकार प्राप्त है।जानकारी के अनुसार नगर में लंबे समय से गुटखे का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।थोक स्तर पर माल मंगाकर बसों और अन्य वाहनों के जरिए विभिन्न क्षेत्रों में सप्लाई की जा रही है। कारोबार का दायरा इतना बड़ा बताया जा रहा है कि इसका वार्षिक कारोबार कई करोड़ों रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है,वही जिला प्रशासन,खाद्य एवं औषधि प्रशासन तथा पुलिस विभाग से मांग की है कि नगर में गुटखे के भंडारण स्थलों की जांच कराई जाए।बस स्टैंड,गोदामों और चिन्हित दुकानों में संयुक्त कार्रवाई कर प्रतिबंधित गुटखे के कारोबार पर अंकुश लगाया जाए, ताकि युवाओं और आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को रोका जा सके।वही जिला प्रशासन द्वारा जिला कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में समय समय पर नशा गुटका और अन्य नशीली पदार्थों पर प्रतिबंध के लिए विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है।साथ ही लोगो को इससे दूर रहने की अपील भी किया जाता है

देखना लाजमी होगा कि प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम चल रहे इस जर्दा यूक्त गुटखे के कारोबार पर प्रशासन कब और कितनी प्रभावी कार्रवाई करता है।